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खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग

बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम

बिहार सरकार

 
   
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  • बिहार स्टेट फ़ूड कारपोरेशन


    बिहार राज्य खाध एवं असैनिक आपूर्ति निगम लि का गठन कम्पनी अधिनियम ,1956 के अन्तर्गत 2 अप्रैल 1973 को किया गया। खाध एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार सरकार द्वारा भारत की सबसे बड़ी जन-वितरण प्रणाली में से एक जिससे द्वारा गेहूँ, चावल इत्यादि का वितरण करीब 45,000 से ज्यादा राशन दुकानों के माध्यम से अन्त्योदय एवं राष्ट्रीय खाध सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत आने वाले करीब 8.57 करोड़ जनता को वितरित किया जाता है।.          

    बिहार राज्य खाध एवं असैनिक आपूर्ति निगम, जो जन-वितरण प्रणाली को लागू करने की नोडल इकार्इ है, द्वारा पारदर्शिता और जवाबदेही तथा गड़बड़ी एवं विचलन रोकने हेतु र्इ.पी.डी.एस. प्रणाली लागू की जा रही है।

    र्इ.पी.डी.एस. के अन्तर्गत सभी जिला प्रबंधक कार्यालय, 57 भारतीय खाध निगम डीपो एवं 534 जन-वितरण प्रणाली भंडार आता है। बिहार राज्य खाध एवं असैनिक आपूर्ति निगम को धान एवं गेहूँ सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य एवं अतिरिक्त बोनस पर किसानों से खरीद हेतु भी नोडल एजेन्सी बनाया गया है।


       


     
    • पूर्णत: स्वसंचालित भंडार निर्गतादेश तैयार करना।
    • पूर्णत: स्वसंचालित जन-वितरण प्रणाली के दूकानदार द्वारा खाधान्न के मूल्य की निर्धारित देय राशि का बैंक खाते से स्वत: मिलान।
    • जन-वितरण प्रणाली के दुकानदारों को खाधान्न की मात्रा का सही तौल दिये जाने हेतु इलेक्ट्रानिक तौल मशीन की स्थापना ।
    • राष्ट्रीय खाध सुरक्षा के अधिनियम 12 (2) (इ) के अन्तर्गत परिवहन में उपयुक्त वाहन में जी.पी.एस. तथा लोड सेल का उपयोग।
    • राज्य खाध निगम के जिला कार्यालय एवं मुख्यालय में अवसिथत कंट्रोल रुम में वाहनों के परिचालन का ससमय अनुश्रवण।
    • लाभुको को खाधान्न वितरण से संबंधित स्वचालित एस.एम.एस. द्वारा जागरुक करना।
    • राष्ट्रीय खाध सुरक्षा के द्वारा 12 (2)(क) के अन्तर्गत एम.आर्इ.एस. द्वारा पारदर्शिता एवं जवाबदेही का निर्धारण करना।
    • तकनिकी समस्याआें का समर्पित हेल्प डेस्क के द्वारा शिकायतों का निदान करना।
    • कम्प्यूटराजेशन द्वारा गोदामों में प्राप्त एवं निर्गत खाधान्न का इन्भेन्टरी का ससमय प्रबंधन।
    • राष्ट्रीय खा़ध सुरक्षा अधिनियम की धारा 14 के अन्तर्गत प्रावधानित समर्पित काल सेन्टर एवं हेल्प लार्इन द्वारा शिकायतों का निवारण करना।